बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया है. इसको लेकर मायावती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लंबा पोस्ट जारी कर कहा कि आकाश आनंद अब पार्टी में पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उन्हें प्राथमिक सदस्यता सहित सभी दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है,
यह फैसला आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा के कुछ घंटों बाद आया.
पूरा मामला क्या है?
दरअसल इसी महीने 3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के महत्वपूर्ण पद से हटा दिया था. उन्होंने कहा था कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है, इसलिए उन्हें फिलहाल बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती. आकाश को साधारण कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में रहने की अनुमति दी गई थी.
मायवती ने रखी शर्त
इसके बाद 9 सितंबर को मायावती ने एक शर्त रखी. उन्होंने कहा कि अगर आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें, तो आकाश पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगे और उनकी जिम्मेदारियां वापस देने पर विचार किया जा सकता है.
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर आरोप लगाया था कि उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को पार्टी के मिशन से ऊपर रखा, जिसका खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ रहा है.
अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा की
अशोक सिद्धार्थ ने 10 सितंबर की सुबह मायावती को संबोधित करते हुए राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास की घोषणा कर दी. उन्होंने भावुक पोस्ट में लिखा कि अगर कभी मायावती के लिए जान भी देनी पड़े तो उन्हें गर्व होगा. लेकिन मायावती ने इस फैसले को “देर आए, दुरुस्त आए” बताया.
उन्होंने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ यह कदम पहले उठा लेते तो BSP, बहुजन समाज, बहुजन आंदोलन और आकाश आनंद को बार-बार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता.
मायावती ने आकाश आनंद पर ‘डबल माइंडेड’ होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आकाश ने उनके पिछले पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया, जिससे साफ है कि वे अपने राजनीतिक करियर और पार्टी के हित से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को महत्व दे रहे हैं. मायावती के अनुसार, जो व्यक्ति पार्टी और परिवार के बीच फंसा रहे, वह BSP और आंदोलन का भला कैसे कर सकता है. इसलिए पार्टी के लोगों की राय में आकाश आनंद को उसी तरह पूरी तरह मुक्त कर देना बेहतर है, जैसे 3 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया था.